प्रदोष व्रत कौन करता है और क्यों और इस कि विधि

प्रदोष व्रत कौन करता है और क्यों और इस कि विधि

जाने कब है प्रदोष व्रत जून माह में :- यह व्रत 30 जुन 2019 को हैं ।


प्रदोष अर्थ:- प्रदोष का हिंदी में अर्थ होता है कि "रात का पहला भाग" होता है। इसीलिए इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं।

यह व्रत भारत में बहुत ही लोकप्रिय हैं इस दिन किसी भी लिंग का व्यक्ति इस व्रत को कर सकता है यह भारत के बहुत से हिस्सों में मनाया जाता है इस दिन Bhagwan Shiv और पार्वती की पूजा करते हैं ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती के साथ बेहद खु थे इसलिए इस वक्त को जो पूरी श्रद्धाके साथ व्रत रखताा है उसे भगवान शिव का दिव्य आशीर्वाद मिलता है। इतनाा ही भारत के कई हिस्सों में शिष्य भगवान शिव केेे नटराज रूप पूजा करते हैं। और शिक्षा का आशीर्वााद लेते
है। इस व्रत को करने के लिए पहली विधि में दिन और रात सख्त उपवास करते हैं।
दूसरी विधि में इस "उपवास को"सूर्योदय से सूर्योदय तक मनाया जाता है और शाम को अपना व्रत को खोलते हैं और भोजन ग्रहण करते हैं।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि:-
1.इस दिन सूर्योदय से पहले पूजा प्रार्थना कर लेते है

2.सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं और साफ वस्त्र पहनकर पूजा प्रात करते हैं
3. इस व्रत में भगवान गणेश भगवान कार्तिकेय भगवान पार्वती और नंदी जी की पूजा करते और उसके बाद में भगवान शिव की पूजा करते हैं और उन्हें किसी बर्तन या कलश में आमंत्रित करते हैं।

4.महा मृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है।

5. बाद में कल से पानी निकाल कर रखते हैं और पानी को अपनी माथे पर लगाते हैं।

6. पूजा के बाद मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने जाते हैं

व्रत दिन व समय:-
30 जून 2019 
7.30pm-9.30 बजें तक

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